अधिकमास में मां भागीरथी में स्थान करने का 21 कुलों को फल मिलता है : ब्रह्माचारी नारायणानंद जी महाराज

अतिमास में मां भागीरथी में स्थान करने का 21 कुलों को फल मिलता है

छठे दिन कथा में बही भक्ति भजनों की धारा

ऋषिकेश। अधिकमास में मां भागीरथी में स्नान करने से 21 कुलों को इसका फल मिलता है। ये शब्द ब्रह्माचारी श्री नारायणानंद जी महाराज ने त्रिवेणी घाट पर जारी श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के छठे दिन कथा में के दौरान कही। मंगलवार को कथा में भक्तों ने भारी संख्या में भाग लिया। कथा में कथावाचक ब्रह्माचारी श्री नारायणानंद जी महाराज ने पधारी हुई धार्मिक जनता को बताया कि हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस देश के वासी हैं, जिसमें श्रीराम-श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक ब्रह्मचारी नारायणानंद जी ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। कथा के दौरान ब्रह्मचारी जी ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आव्हान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। उन्होंने बताया कि रास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है जिसमें दु:ख, शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक है। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया।

Dharma yog

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *